Thursday, November 24, 2016

मियाद - Expiry Date



साहिबा, जो पल गुज़ारे थे  हमने 
एक दूजे कि बाहों में, 
वो आज बस ख़याल बने मंडरा रहे  हैं !

दफन करदूँगा उन ख्यालों को आज 
लपेट के इस कोरे कागज़ के कफ़न में
बांधूंगा कस के इन काले लफ़्ज़ों में 
उन ख्यालों को आज
और लगाऊँगा मोहर  मियाद की !

पता चले दुनिया को 
कि, खत्म हुई है ये कहानी हमारी !


Copyright @ Ajay Pai 2016
Image courtesy : Aj's album.

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